बेरोजगारी से आहत व्यक्ति का व्यैक्तिक विघटन तो होता ही है साथ ही यह पारिवारिक विघटन का भी उदगम स्त्रोत है। पैसे की तंगी, पग-पग पर परेशानी, चिंता और कलह को जन्म देती है। परिवार के सदस्यों को जब भरपेट भोजन नहीं मिलता, तन ढकने के लिए जब परिधान व वस्त्र प्राप्त होता, रहने के लिए घर नसीब नहीं होता और जब जीवन की अन्य सुविधाओं से वंचित रहना पड़ता है, ऐसे में पति-पत्नी के बिच सम्बन्ध-विच्छेद व तलाक भी हो जाता है। बच्चे अनाथ हो जाते है। वे गलियों में कबाड़ी का काम करने लगते है।अनेकानेक संकटों का सामना करना पड़ता है। संकट के दिनों में बेरोजगार व्यक्ति स्वयं अपने परिवार के लिए तो बोझ बनता ही है, समाज के लिए समुदाय के लिए और यहाँ तक की राष्ट्र के लिए भी बोझ बन जाता है। कोना महामारी के चलते समय मजदूर वर्ग के लिए दुख का विषय है